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पारसी नव वर्ष (शहंशाही)

पारसी नव वर्ष (शहंशाही) 2021, 2022 और 2023

हालाँकि, पारसी नव वर्ष की उत्पत्ति पर्शिया में हुई थी, लेकिन भारत देश में भी कई लोग इसे मनाते हैं।

सालतारीखदिनछुट्टियांराज्य / केन्द्र शासित प्रदेश
202116 अगस्तसोमवारपारसी नव वर्ष (शहनशाही) DD, DN, GJ & MH
202216 अगस्तमंगलवारपारसी नव वर्ष (शहनशाही) DD, DN, GJ & MH
202316 अगस्तबुधवारपारसी नव वर्ष (शहनशाही) DD, DN, GJ & MH
202415 अगस्तगुरूवारपारसी नव वर्ष (शहनशाही) DD, DN, GJ & MH
कृपया पिछले वर्षों की तारीखों के लिए पृष्ठ के अंत तक स्क्रॉल करें।

दुनिया भर में, लोग यह पर्व पारसी पंचांग के पहले महीने के पहले दिन मनाते हैं। यह 21 मार्च को पड़ता है। दूसरी तरफ, भारत में लोग शहंशाही पंचांग का अनुसरण करते हैं, जिसका अर्थ है कि नव वर्ष का त्योहार वर्ष के आगे के महीनों में पड़ता है। यह प्रत्येक वर्ष परिवर्तित होता है क्योंकि पंचांग अधिवर्षों को ध्यान में नहीं रखता है।

विभिन्न धर्मों के लोग विविध उत्सवों के जश्न में शामिल होते हैं। हालाँकि, पारसी नव वर्ष केवल पारसी धर्म से संबंधित लोगों से जुड़ा रहता है। यह उत्सव वास्तव में ब्रह्मांड में सभी चीजों के वार्षिक नवीनीकरण को दर्शाता है। लोक कथाओं के अनुसार, नबी ज़रथुश्त्र ने यह पर्व बनाया था और यह आज भी महाराष्ट्र के निवासियों के लिए एक अत्यधिक महत्वपूर्ण त्योहार है।

इस दिन की तैयारी के लिए, सभी लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और इसे ज्यादा से ज्यादा स्वच्छ बनाते हैं। घर के आंतरिक और बाहरी हिस्सों में विशेष सजावट की जाती है। विशेष रूप से, घर का दरवाज़ा आंगतुकों के लिए आकर्षक और सुंदर लगना चाहिए। इन सजावटों में फूलों की माला और चाक पाउडर से बनाये गए प्राकृतिक दृश्य शामिल होते हैं। साथ ही, नहाना और तैयार होना भी विशेष महत्वपूर्ण होता है।

नाश्ते के बाद अग्नि मंदिर जाना पूरे पर्व को एक साथ जोड़ता है। लोग प्रार्थना करने के लिए एक साथ मंदिर जाते हैं और नव वर्ष की शुभकामनाएं देते हैं। इस समय के दौरान, लोग अपने अच्छे और बुरे कर्मों पर विचार करते हैं और आगामी वर्ष के लिए सकारात्मक संभावनाओं पर ध्यान देने का प्रयास करते हैं।

मुलाकात और शुभकामनाओं के बाद, जश्न शुरू होता है और लोग मूंग दाल, पुलाव और साली बोटी जैसे विभिन्न विशेष आहारों का आनंद उठाते हैं। मेहमानों का स्वागत करने के लिए घर के दरवाज़े पर उनके ऊपर गुलाबजल छिड़का जाता है। अक्सर, लोग गरीबों को दान देने के लिए भी इस पवित्र समय का प्रयोग करते हैं।

पिछले कुछ वर्ष

सालतारीखदिनछुट्टियांराज्य / केन्द्र शासित प्रदेश
202016 अगस्तरविवारपारसी नव वर्ष (शहनशाही) DD, DN, GJ & MH
201917 अगस्तशनिवारपारसी नव वर्ष (शहनशाही) GJ & MH
201817 अगस्तशुक्रवारपारसी नव वर्ष (शहनशाही) GJ & MH
201717 अगस्तगुरूवारपारसी नव वर्ष (शहनशाही) GJ & MH