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मिलाद-उन-नबी

मिलाद-उन-नबी 2017 और 2018

मिलाद-उन-नबी भारत का एक इस्लामी सार्वजनिक अवकाश है।

सालतारीखदिनछुट्टियांराज्य / केन्द्र शासित प्रदेश
20171 दिसंबरशुक्रवारमिलाद-उन-नबीAP, JK, KA, MH, TG
& TN
2 दिसंबरशनिवारमिलाद-उन-नबीसभी राज्य सिवाय AN, AP, AR,
AS, BR, GA, HP, JK,
KA, MH, MN, ML, PB,
SK, TN, TG & WB
8 दिसंबरशुक्रवारमिलाद-उन-नबी के बाद शुक्रवारJK
201821 नवंबरबुधवारमिलाद-उन-नबीसभी राज्य सिवाय AN, AR, AS,
BR, GA, HP, MN, ML,
PB, SK & WB
23 नवंबरशुक्रवारमिलाद-उन-नबी के बाद शुक्रवारJK
लोकप्रिय छुट्टियां:

ईद-ए-मिलाद के रूप में जाना जाने वाला, मिलाद-उन-नबी पैगम्बर मुहम्मद के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह उत्सव मुहम्मद के जीवन और उनकी शिक्षाओं की भी याद दिलाता है। मिलाद-उन-नबी इस्लामी पंचांग के तीसरे महीने रबी-उल-अव्वल के 12वें दिन मनाया जाता है। हालाँकि मुहम्मद का जन्मदिन एक खुशहाल अवसर है, लेकिन मिलाद-उन-नबी शोक का भी दिन है। यह इस वजह से क्योंकि रबी-उल-अव्वल के 12वें दिन ही पैगम्बर मुहम्मद की मृत्यु भी हुई थी।

इतिहास

मिलाद-उन-नबी इस्लाम के प्रमुख पैगम्बर मुहम्मद का जन्मोत्सव है। ऐतिहासिक ग्रंथों के अनुसार, मुहम्मद का जन्म सन् 570 में सऊदी अरब में हुआ था। इस्लाम के ज्यादातर विद्वानों ने पता लगाया है कि मुहम्मद का जन्म इस्लामी पंचांग के तीसरे महीने के 12वें दिन हुआ है। अपने जीवनकाल के दौरान, मुहम्मद ने इस्लाम धर्म की स्थापना की और एकमात्र साम्राज्य के रूप में सऊदी अरब का निर्माण किया जो अल्लाह की इबादत के लिए समर्पित था। सन् 632 में पैगम्बर मुहम्मद की मृत्यु के बाद, कई मुसलमानों ने विविध अनौपचारिक उत्सवों के साथ उनके जीवन और उनकी शिक्षाओं का जश्न मनाना शुरू कर दिया।

इन विभिन्न जश्न की परंपराओं के बावजूद, फातिमा के द्वारा मिस्र में मिलाद-उन-नबी स्थापित करने तक पैगम्बर मुहम्मद का जन्मदिन व्यापक रूप से नहीं मनाया जाता था। मुहम्मद के जन्मदिन के पहले औपचारिक जश्न में मुस्लिम और इस्लामी विद्वानों ने मस्जिदों में नमाज़ पढ़ा। धार्मिक उपदेश और चर्चाएं उन कुछ तरीकों में से एक थे जिनके माध्यम से मुस्लिमों ने पहला मिलाद-उन-नबी का उत्सव मनाया था।

मिस्र में पहले मिलाद-उन-नबी के बाद, यह उत्सव दुनिया भर के इस्लामी समुदायों के लिए सामान्य बन गया।

परंपरा

मुस्लिम अपनी मान्यताओं और प्राथमिकताओं के आधार पर पैगम्बर मुहम्मद के जन्म और मृत्यु को याद करते हैं। कुछ लोग मिलाद-उन-नबी को खुशहाल उत्सव के रूप में मनाते हैं, लेकिन अन्य इसे शोक का दिन मानते हैं।

  • मिठाइयां बांटना

मिलाद-उन-नबी पर लोगों को मिठाइयां और अन्य पकवान बांटना एक सामान्य अभ्यास है। इस उत्सव के दौरान शहद सबसे ज्यादा बांटी जाने वाली मिठाइयों में इसे एक है। यह इसलिए क्योंकि कई विद्वान मानते हैं कि शहद पैगम्बर मुहम्मद को सबसे ज्यादा पसंद था।

  • मस्जिद जाना

मिलाद-उन-नबी के दिन मुस्लिम मस्जिदों में जाते हैं। मस्जिद में वे उपदेश सुनते हैं और पैगम्बर मुहम्मद और अल्लाह के लिए नमाज़ पढ़ते हैं। औपचारिक कार्य के बाद, लोग अपने दोस्तों और परिजनों के साथ मुहम्मद और इस्लामी इतिहास की चर्चा करते हैं।

  • परिवार को समय देना

हालाँकि, मिलाद-उन-नबी के दौरान कई सार्वजनिक स्थानों पर कार्यक्रम होते हैं, लेकिन उत्सव से संबंधित कुछ सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम निजी निवास स्थानों के अंदर होते हैं। पूरा परिवार मुहम्मद के कार्यों पर चिंतन करता है और वे अपनी दैनिक गतिविधियों को सुधारन के तरीकों के बारे में सोचते हैं। यह लोगों को काम से थोड़ा समय निकाल कर अपने परिवार के लोगों से जुड़ने का भी अवसर देता है।

  • गीत गाना

मिलाद-उन-नबी के दौरान भारत के मुस्लिम लोग अक्सर सार्वजनिक स्थानों पर गीत गाते हैं। इस उत्सव के लिए सबसे लोकप्रिय गानों में से एक है मौलूद। इस्लाम की परंपरा के अनुसार, यह गीत अच्छा भाग्य लाता है और अल्लाह के लिए वफादारी को मजबूत बनाता है।

  • बारा वफात

भारत में मिलाद-उन-नबी के दौरान मुस्लिम लोग कई खुशहाल जश्नों में शामिल होते हैं, लेकिन वे बारा वफात भी मनाते हैं। बारा वफात शोक का अवसर है जो लोगों को पैगम्बर मुहम्मद की मृत्यु का शोक मनाने की अनुमति देता है। यह मुहम्मद की बीमारी और अंत में उनकी मृत्यु के बारह दिनों की याद में मनाया जाता है। इस उत्सव से संबंधित सबसे लोकप्रिय कार्यक्रमों में से एक है शीशे के ताबूत का जुलूस। इस अवसर के दौरान, पैगम्बर मुहम्मद के एक प्रतीक को शीशे के ताबूत में रखकर लोगों के बीच जुलूस निकाला जाता है।

  • उपदेश

मिलाद-उन-नबी धार्मिक विद्वानों और इतिहासकारों के लिए एक बड़ा समारोह है। ये लोग मुहम्मद और इस्लाम के बारे में उपदेशों और विचारशील चर्चाओं में हिस्सा लेते हैं। अक्सर विवादास्पद धार्मिक विषयों के बारे में भी चर्चा की जाती है।

  • कला

भारत में, मुस्लिम कविता और निबंध लिखकर भी मुहम्मद के जीवन और कार्यों को याद करते हैं। कलाकार मिलाद-उन-नबी के अवसर के लिए उपयुक्त चित्र और प्रतिमाएं बनाते हैं।