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महावीर जयंती

महावीर जयंती 2018 और 2019

सालतारीखदिनछुट्टियांराज्य / केन्द्र शासित प्रदेश
201829 मार्चगुरूवारमहावीर जयंतीAR, CG, DL, DN, GJ, HR,
KA, LD, MH, MP, MZ, PB,
RJ, TN & UP
20199 अप्रैलबुधवारमहावीर जयंतीAR, CG, DL, DN, GJ, HR,
KA, LD, MH, MP, MZ, PB,
RJ, TN & UP

महावीर जयंती एक बड़ा उत्सव है जिसे जैन धर्म के अनुयायियों के द्वारा मनाया जाता है, जो संपूर्ण भारत के कई ग्रामीण समुदायों में प्रमुख धर्म है। यह उत्सव भगवान महावीर के जन्म और उनके जीवन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जो जैनों के महत्वपूर्ण धार्मिक व्यक्ति हैं। इस अवकाश की सांस्कृतिक महत्ता काफी ज्यादा है, इसलिए अक्सर राजनैतिक हस्तियां टेलीविज़न और रेडियो प्रसारण के माध्यम से इसकी शुभकामनाएं देते हैं। महावीर जयंती ग्रेगोरियन पंचांग में निर्धारित नहीं होता है, इसलिए इसकी तिथियों में अंतर होता है। यह हमेशा मार्च या अप्रैल में मनाया जाता है। इस उत्सव के दौरान, लोग भगवान महावीर की शिक्षाओं को याद करते हैं। यह विनम्रता और खुशी का दिन है।

भगवान महावीर का जीवन और शिक्षाएं

भगवान महावीर का जन्म ईसा पूर्व चौथी शताब्दी में भारत के बिहार नामक राज्य में एक श्रेष्ठ परिवार में हुआ था। अपने जीवनकाल के दौरान, भगवान महावीर को वर्धमान के रूप में जाना जाता था। वर्धमान, कई तरीकों से, बौद्ध धर्म के सिद्धार्थ गौतम के समान हैं। सिद्धार्थ के समान, वर्धमान ने भी सांसारिक कष्टों को देखने के बाद सत्य की खोज करने के लिए अपना आरामदायक घर छोड़ दिया था। विभिन्न संस्कृतियों और पृष्ठभूमियों के लोगों से मिलने के बाद, वर्धमान को संसार और पीड़ा के स्त्रोतों का काफी ज्ञान हुआ। अंत में, वर्धमान ने अपने प्रयासों को उपवास और ध्यान पर केंद्रित कर दिया।

इस प्रक्रिया के माध्यम से, वर्धमान को मोक्ष की प्राप्ति हुई। उन्होंने पाया कि अपनी असीमित इच्छाओं को समाप्त करने के लिए मनुष्यों के लिए लालच और सांसारिक चीजों से अपना संबंध तोड़ना जरुरी होता है। इस ज्ञान के साथ, जैन धर्म का प्रचार-प्रसार करने के लिए वर्धमान ने भारत और एशिया के अन्य क्षेत्रों की यात्रा की। इस समय के दौरान, वर्धमान का साम्राज्य बहुत अधिक समृद्ध हो गया था। कई लोगों ने इस आशा के साथ जैन धर्म अपना लिया कि उन्हें भी प्रसन्नता की समान स्थिति का अनुभव हो जायेगा। मोक्ष पाने के पश्चात वर्धमान की मृत्यु हो गयी। 425 ईसा पूर्व में वर्धमान को भगवान महावीर, धर्म के अंतिम तीर्थंकर और सर्वज्ञ गुरु के रूप में जाना जाने लगा। कई लोग अपने कर्मों और भगवान महावीर की शिक्षाओं पर विचार करने के लिए महावीर जयंती मनाते हैं।

मोक्ष पाने के बाद, भगवान महावीर ने पांच सिद्धांत सिखाएं जो समृद्ध जीवन और आंतरिक शांति की ओर ले जाते हैं। पहला सिद्धांत है अहिंसा। अहिंसा का सिद्धांत कहता है कि सभी जैनों को किसी भी परिस्थिति में हिंसा से दूर रहना चाहिए। दूसरा सिद्धांत है सत्य। सत्य के सिद्धांत के अनुसार, लोगों को हमेशा सत्य बोलना चाहिए। तीसरा सिद्धांत है अस्तेय। अस्तेय का पालन करने वाले लोग चोरी नहीं करते हैं। ये लोग संयम से रहते हैं और केवल वही लेते हैं जो उन्हें दिया जाता है। चौथा सिद्धांत है ब्रह्मचर्य। इस सिद्धांत के लिए जैनों को पवित्रता के गुणों का प्रदर्शन करने की जरुरत होती है; उन्हें शारीरिक गतिविधियों में बहुत अधिक भाग नहीं लेना चाहिए। अंतिम सिद्धांत है अपरिग्रह। यह शिक्षा सभी पिछले सिद्धांतों को जोड़ती है। अपरिग्रह का पालन करके, जैनों की चेतना जाग जाती है और वे अपनी वस्तुओं की इच्छाओं को समाप्त कर लेते हैं।

उत्सव की गतिविधियां

जैन ऐसी कई गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं जो उन्हें अपने परिजनों से जुड़ने का और भगवान महावीर को याद करने का मौका देते हैं।

  • शोभायात्रा
    महावीर जयंती की सबसे लोकप्रिय गतिविधियों में से एक है भगवान महावीर की प्रतिमा की शोभायात्रा। इस गतिविधि के दौरान जैन भिक्षु एक रथ पर भगवान महावीर की प्रतिमा को लेकर हर जगह घुमाते हैं। इस यात्रा के समय, लोग एकत्रित होकर महावीर जी के लिए विशेष प्रार्थनाओं, या भजनों का गान करते हैं।
  • प्रतिमा धोना 
    लोग अक्सर भगवान महावीर की प्रतिमाओं को जल और सुगन्धित तेलों से धोते हैं। यह महावीर की शुद्धता का प्रतीक है। यह वर्ष के दौरान नियमित पूजी जाने वाली सुंदर धार्मिक प्रतिमाओं को धोने के व्यावहारिक उद्देश्यों को भी पूरा करता है।
  • मंदिरों में जाना
    महावीर जयंती के दौरान, दुनिया भर के लोग भारत के जैन मंदिरों में दर्शन करने के लिए आते हैं। मंदिरों में जाने के अलावा, लोग महावीर और जैन धर्म से संबंधित पुरातन स्थानों पर भी जाते हैं। गोमतेश्वर, दिलवाड़ा, रणकपुर, सोनागिरि और शिखरजी कुछ सबसे लोकप्रिय स्थानों में से एक हैं।
  • दान
    अपनी विनम्र जीवनशैली को दर्शाने के लिए, कई जैन लोग महावीर जयंती के दौरान मंदिरों में धन, भोजन और कपड़े भी दान देते हैं। संन्यासी अक्सर अपनी आवश्यक चीजों को रखकर बाकी चीजें गरीब लोगों में दान कर देते हैं।

महावीर जयंती भगवान महावीर के जन्म और जैन धर्म की स्थापना के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।