Start Planning
महा शिवरात्रि

महा शिवरात्रि 2018 और 2019

महा शिवरात्रि भारत के सबसे प्रमुख हिन्दू त्योहारों में से एक है। यह भगवान शिव और उनकी पत्नी माता पार्वती की आराधना का उत्सव है।

सालतारीखदिनछुट्टियांराज्य / केन्द्र शासित प्रदेश
201814 फरवरीबुधवारमहाशिवरात्रिसभी राज्य
(सिवाय AN, AR, AS, BR,
DN, GA, LD, MP, MN, ML,
MZ, NL, PY, SK, TN &
WB)
20194 मार्चसोमवारमहाशिवरात्रिसभी राज्य
(सिवाय AN, AR, AS, BR,
DN, GA, LD, MP, MN, ML,
MZ, NL, PY, SK, TN &
WB)

यह त्योहार पूरे भारतवर्ष, नेपाल, बांग्लादेश और दुनिया के उन सभी हिस्सों में मनाया जाता है जहाँ हिंदू जनसंख्या ज्यादा है।

यह त्योहार ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार फरवरी या मार्च में पड़ता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह फाल्गुन मास के 14वें दिन और 13वीं रात्रि को पड़ता है, माना जाता है कि यह दिन भगवान शिव का “वर्ष का पसंदीदा दिन” है। हिन्दू वर्ष के दौरान मनाये जाने वाले बारह शिवरात्रि उत्सवों में से महा शिवरात्रि को सबसे पवित्र माना जाता है।

“शिवरात्रि” का अर्थ है “भगवान शिव की महान रात्रि,” फाल्गुन के 13वें दिन भगवान शिव के सभी भक्तों के द्वारा पूरी रात जागरण रखा जाता है। यह ज्यादातर हिन्दू उत्सवों से अलग है, जिन्हें दिन के समय मनाया जाता है। रात्रि के समय भगवान शिव की पूजा और आराधना उस दिन का स्मरण करने के लिए मनाया जाता है जब भगवान शिव ने “संसार का विनाश होने से बचाया था,” जिसे अंधकार से दर्शाया जाता है।

फाल्गुन की 14वीं तिथि को हिन्दू पूरे दिन व्रत रखते हैं। वे भगवान शिव को फूल, बेलपत्र, और फल भी अर्पण करते हैं। वे दीप, अगरबत्ती जलाते हैं, गंगा और अन्य पवित्र नदियों में पवित्र स्नान करते हैं, योग ध्यान करते हैं, और पूरे दिन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करते हैं। इस दिन भारतवर्ष के संपूर्ण मंदिर भक्तगणों के “हर हर महादेव!” के जयकारों से गूंजते हैं। साथ ही, वे मंदिर की घंटियां बजाते हैं और, इसके बाद शिवलिंग का चक्कर लगाते हैं, इसे जल या दूध से स्नान कराते हैं। अंत में, वे शुद्धता, ज्ञान और प्रायश्चित के प्रतीक के रूप में अपने माथे पर “पवित्र भस्म” की तीन रेखाएं लगाते हैं।

महा शिवरात्रि के दौरान भारत में स्थानीय लोग और पर्यटक निम्नलिखित में से किसी भी गतिविधि में शामिल हो सकते हैं:

  • संपूर्ण भारत में हिन्दू मंदिरों के आसपास होने वाले उत्सवों और मेलों में जाएँ। मंदिर दीयों, फूलों और अन्य सजावटों से युक्त होंगे, और कई पर्यटक इसमें शामिल होते हैं। उत्तर भारत के मंडी शहर में होने वाला कार्यक्रम संभवतः सबसे बड़ा होता है जहाँ 81 मंदिर हैं। मध्य भारत में, महा शिवरात्रि के उत्सव के लिए महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध दर्शन स्थलों में से एक है। दक्षिण भारत में, कर्नाटक में विश्वनाथ मंदिर के पास होने वाले कार्यक्रम सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
  • यदि आप चाहें तो महा शिवरात्र से जुड़ी कुछ कहानियों के बारे में जान सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान विष का घड़ा निकलने पर संसार को बचाने के लिए शिवजी ने इसे स्वयं पी लिया था, लेकिन उन्होंने इसे निगला नहीं। हालाँकि, इसकी वजह से उनका गला नीला पड़ गया। एक अन्य कथा के अनुसार, एक बार एक आदमी जंगल में लकड़ियां चुनने के लिए गया और उसे वहां रात हो गयी। वह सुरक्षित रहने के लिए पेड़ पर चढ़ गया, और जगे रहने के लिए (और पेड़ से गिरने से बचने के लिए), उसने भगवान शिव का नाम लेते हुए पेड़ की पत्तियों को तोड़कर एक-एक करके गिराना शुरू कर दिया। संयोग से, पेड़ के नीचे एक शिवलिंग था, और चूँकि शिवजी को यह अनुभव बहुत पसंद आया, इसीलिए वर्तमान में भगवान शिव का रात में जप किया जाता है और उन्हें बेलपत्र चढ़ाये जाते हैं।
  • महा शिवरात्रि को भारत में वसंत ऋतु के आगमन और विशेष रूप से फूलों के खिलने से जोड़ा जाता है। इसलिए, आप बैंगलोर के लालबाग बॉटनिकल गार्डन और इसके प्रसिद्ध फूलों के पौधे और “हाउस ऑफ ग्लास” देखने जा सकते हैं। यहाँ एक झील और उष्णकटिबंधीय पक्षी अभयारण्य भी है। एक दूसरा विकल्प पश्चिम हिमालय के राज्य में फूलों की घाटी का राष्ट्रीय उद्यान भी हो सकता है। यह पहाड़ पूरी तरह से अल्पाइन फूलों से ढंका होता है।

हालाँकि, महा शिवरात्रि हिंदुओं का धार्मिक उत्सव है और हिन्दू मंदिरों पर केंद्रित होता है, लेकिन इसमें जीवंत और रुचिकर सांस्कृतिक गतिविधियां भी होती हैं जिन्हें पर्यटक देख सकते हैं।