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गुरु नानक जयंती

गुरु नानक जयंती 2017 और 2018

गुरु नानक जयंती सिखों का त्योहार है जो प्रत्येक वर्ष पूरे भारत में मनाया जाता है।

सालतारीखदिनछुट्टियांराज्य / केन्द्र शासित प्रदेश
20174 नवंबरशनिवारगुरु नानक जयंतीAS CG CH DL GJ HP
HR JH JK MH MP PB
RJ TG UK UP WB
201823 नवंबरशुक्रवारगुरु नानक जयंतीAS CG CH DL GJ HP
HR JH JK MH MP PB
RJ TG UK UP WB

गुरु नानक जयंती को प्रकाश उत्सव के रूप में भी जाना जाता है, और यह सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक देव के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। हालाँकि, गुरु नानक जयंती सिख उत्सव है, लेकिन हिंदुओं और धर्मनिरपेक्ष लोगों सहित भारत के कई धार्मिक समूहों द्वारा इस उत्सव का आनंद उठाया जाता है। निश्चित रूप से, यह विशेष रूप से भारत के पंजाब राज्य का मुख्य पर्व है क्योंकि वहां सिखों की अधिकांश जनसंख्या निवास करती है।

गुरु नानक जयंती खुशियों और आनंद का समय है, लेकिन यह उत्सव गुरु नानक देव की शिक्षाओं पर भी प्रकाश डालता है। यह उत्सव कटक महीने के दौरान पूर्णिमा वाले दिन शुरू होता है। हालाँकि, चंद्र पंचांग प्रत्येक वर्ष बदलता है, इसलिए गुरु नानक जयंती ग्रेगोरियन पंचांग पर अक्टूबर या नवंबर के दौरान मनाई जाती है।

गुरु नानक का जीवन और सिद्धांत

इस बात को अच्छी तरह से समझने के लिए कि यह उत्सव कई भारतीयों लोगों के लिए इतना पवित्र क्यों है, इस बात को समझना बहुत आवश्यक है कि नानक जी के कार्यों ने भारत के संपूर्ण इतिहास को कैसे आकार दिया। सन् 1469 में गुरु नानक के जन्म से पहले, भारत को मूल रूप से जाति प्रथा के रूप में जानी जाने वाली सामाजिक श्रेणी द्वारा परिभाषित किया जाता था। इस प्रथा की वजह से गरीब लोग गरीब ही रहते थे और अमीर लोग निरंतर रूप से अपनी शक्ति को विस्तारित करते थे। गुरु नानक जी ने यह समझ लिया था कि यह प्रथा गलत है, इसलिए उन्होंने इससे लड़ने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

अत्यधिक ध्यान और आत्म-चिंतन के बाद, गुरु नानक को एक स्वप्न आया जिसने उन्हें परमात्मा का सच्चा उद्देश्य दिखाया। इस स्वप्न के अनुसार, परमात्मा से जुड़ने के लिए औपचारिक संस्थान और जाति प्रथा आवश्यक नहीं है। गुरु नानक के स्वप्न का मूलभूत पहलू यह था कि सभी मनुष्यों का परमात्मा से सीधा संपर्क है। इसके बाद, गुरु नानक देव ने पुजारियों और जाति प्रथा को अस्वीकार कर दिया। गुरु नानक ने हिन्दू धर्म के पवित्र ग्रंथ, वेदों का ज्ञान लेने से भी मना कर दिया।

सबसे पहले, गुरु नानक को विधर्मी के रूप में माना गया जिसने परमात्मा को अस्वीकार किया था। इस स्थिति में तब परिवर्तन हुआ जब दलितों, और निम्न वर्ग के लोगों को यह अनुभव हुआ कि गुरु नानक के सिद्धांत के अंतर्गत उनका जीवन ज्यादा बेहतर हो सकता है। इसके बाद जल्दी ही, गुरु नानक को कई लोगों के द्वारा एक नायक के रूप में देखा जाने लगा। गुरु नानक ने अपने अनुयायियों को यह शिक्षा भी दी कि उपवास और तीर्थस्थलों जैसे पारंपरिक साधनों के माध्यम से परमेश्वर से नहीं जुड़ा जा सकता है। उन्होंने अपने अनुयायियों को नैतिक जीवन का आनंद उठाते हुए प्रार्थना के माध्यम से परमात्मा से जुड़ने की सलाह दी।

जाति प्रथा को नष्ट करने के बाद, गुरु नानक पुजारियों और मुगल शासकों के राजनैतिक शत्रु बन गए। मुगल राजा बाबर को चुनौती देने के कारण बाद में गुरु नानक जी को बंदी बना लिया गया। गुरु नानक जी ने सिख धर्म की स्थापना की। उनकी मृत्यु के पश्चात, गुरु नानक जी की बुद्धिमता और भावना नौ सिख गुरुओं को मिली।

उत्सव की गतिविधियां

गुरु नानक देव के जीवन और शिक्षाओं को याद करने के लिए सिख और अन्य भारतीय कई गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।

  • अखंड पाठ
    गुरु नानक जयंती शुरू होने से पहले, मुख्य सिख क्षेत्रों में केंद्रीय स्थानों पर लगातार पाठ किया जाता है। जिसे अखंड पाठ के रूप में जाना जाता है, यह कार्यक्रम 48 घंटे तक चलता है। अखंड पाठ के दौरान, सिख धर्म की पवित्र पुस्तक गुरु ग्रंथ साहिब की कुछ सबसे महत्वपूर्ण कविताओं का पाठ किया जाता है। कई बार, सिख लोग प्रार्थना का जाप भी करते हैं। इस उत्सव के लिए सबसे लोकप्रिय प्रार्थनाएं जपजी साहिब और सिद्ध गोश है।
  • नगर कीर्तन
    उत्सव से एक दिन पहले, सिख समुदाय के लोग नगर कीर्तन में हिस्सा लेते हैं, जो एक जीवंत जुलूस है जो दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करता है। यह जुलूस पांच लोगों और एक सिख झंडे के साथ निकाला जाता है। इस जुलूस में गीतकार, कोरियोग्राफर और मार्शल आर्टिस्ट भी शामिल होते हैं। जिन मार्गों पर यह कार्यक्रम होता है उन्हें अक्सर विभिन्न बैनरों और फूलों से सजाया जाता है।
  • लंगर
    कटक मास की पूर्णिमा के दिन, गुरु नानक जयंती मनाने वाले लोग अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ मुफ्त सामुदायिक भोजन का आनंद उठा सकते हैं। भोजन के बाद, सिख शाम की प्रार्थनाओं में शामिल होते हैं।

गुरु नानक जयंती एक शांतिपूर्ण उत्सव है जो लोगों को गुरु नानक जी और भारतीय जाति प्रथा को समाप्त करने की उनकी इच्छा की याद दिलाता है।