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ईस्टर

ईस्टर 2018 और 2019

धार्मिक रूप में, भारत में हिन्दुओं की जनसंख्या 80 प्रतिशत, मुस्लिमों की जनसंख्या 14 प्रतिशत, और ईसाईयों की जनसंख्या केवल 2.5 प्रतिशत है। इसके बावजूद, भारत में ऐसे कई क्षेत्र हैं जहाँ ईसाईयों की एक बड़ी जनसंख्या लंबे समय से निवास कर रही है, जो ईसाईयों के प्रमुख उत्सव ईस्टर को हर वर्ष पूरी निष्ठा के साथ मनाते हैं।

सालतारीखदिनछुट्टियांराज्य / केन्द्र शासित प्रदेश
201830 मार्चशुक्रवारगुड फ्राइडेसभी राज्य
(सिवाय HR & JK)
1 अप्रैलरविवारईस्टरKL & NL
201919 अप्रैलशुक्रवारगुड फ्राइडेसभी राज्य
(सिवाय HR & JK)
21 अप्रैलरविवारईस्टरKL & NL

दुनिया के अन्य हिस्सों के समान, वर्ष के लिए पंचांग और इस विशेष संप्रदाय की परंपराओं के आधार पर, ईस्टर मार्च के अंत में या अप्रैल के प्रारंभ में पड़ता है। कई लोगों के लिए, ईस्टर का मौसम ईस्टर संडे से 40 दिन पहले उपवास के साथ शुरू होता है, जो ईस्टर से पहले के सप्ताह के दौरान तेज हो जाता है और, मध्यरात्रि सेवा के साथ और ईस्टर की अगली सुबह समाप्त होता है।

गुड फ्राइडे पर ईसा मसीह की मृत्यु के तीन दिन बाद कब्र से पुनर्जीवित होने की घटना के स्मरण में ईस्टर मनाया जाता है। हालाँकि, पवित्र सप्ताह पाम रविवार के साथ शुरू होता है, जब मसीह ने यरूशलेम में प्रवेश किया था और भीड़ उनके स्वागत में चिल्ला रही थी कि, “धन्य है वो जो परमेश्वर के नाम पर आता है!” मौण्डी थर्सडे के दिन, अंतिम भोज को याद किया जाता है, जब यीशु ने अपने शिष्यों के पैर धोये थे और अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी की थी। ईस्टर के चालीस दिन बाद, यीशु ने स्वर्ग प्रस्थान किया था, और ईस्टर के 50 दिन बाद, उन्होंने पेन्टिकॉस्ट के दिन परमात्मा को भेजा था। कई गिरजाघर इन सभी दिनों पर विशेष सेवाओं का आयोजन करते हैं।

भारत में, यदि किसी के दोस्त या रिश्तेदार ईसाई हैं, या यदि उनका कोई परिचित ईसाई नहीं है तो भी ऐसे कई लोग ईस्टर के समारोहों में शामिल होते हैं जो ईसाई धर्म से संबंधित नहीं हैं। परिवार के लोग विशेष रात्रि भोजन के लिए एकत्रित होते हैं, विशेष प्रार्थना सेवाएं आयोजित की जाती हैं, कई लोग ईस्टर अंडे सजाते हैं और ईस्टर बन्नी “से” बच्चों के लिए उपहार भी देते हैं, और वयस्क लोग भी एक-दूसरे को उपहार देते हैं, हालाँकि इसमें कोई खरगोश शामिल नहीं होता है।

भारत के लगभग 60 प्रतिशत ईसाई तीन विशेष क्षेत्रों में रहते हैं: विभिन्न उत्तर-पूर्वी राज्य, जैसे नागालैंड और मणिपुर, गोवा का पश्चिमी राज्य, और केरल और तमिलनाडु के दक्षिणी राज्य। नीचे बताया गया है कि इन प्रत्येक क्षेत्रों में ईस्टर के दिन पर्यटक क्या कर सकते हैं:

  • उत्तर-पूर्वी भारत में पांच मिलियन से अधिक ईसाई रहते हैं, और इसलिए यहाँ ईस्टर प्रार्थना सेवाएं और विशेष गिरजाघर कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। नागालैंड में, ईस्टर सूर्योदय सेवा के लिए द्वितीय विश्वयुद्ध के कब्रिस्तान में एकत्रित होने की परंपरा है। इसमें सभी लोग शामिल हो सकते हैं, और इसमें विभिन्न गिरजाघर शामिल होते हैं। इस क्षेत्र में आप अपने चारों तरफ सुंदर पहाड़ और प्राकृतिक दृश्यों की अद्भुत छटा देख सकते हैं, और यहाँ घूमने के लिए दर्ज़नों राष्ट्रीय उद्यान और वन्य जीव संरक्षण स्थान मौजूद हैं।
  • गोवा में, ईस्टर ना केवल विशेष सभाओं और गिरजाघर सेवाओं का समय है, बल्कि यह गोवा कार्निवाल के लिए भी प्रसिद्ध है। ईस्टर का जश्न मनाने के लिए यहाँ स्ट्रीट ड्रामा, गाना, नाचना, जहाज़ की सवारी, परिधानों जैसे कई आयोजन किये जाते हैं। साथ ही, फूल और ईस्टर लालटेन भी देखें जो वर्ष के इस समय गोवा में उपहारों के रूप में दिए जाते हैं। कार्निवाल गोवा के प्रसिद्ध समुद्र तटों पर भी पहुंचेगा, और यदि आप चाहें तो तैराकी और पानी के खेलों का आनंद भी उठा सकते हैं। साथ ही, गोवा के पुर्तगाली-शैली में बनाये गए घरों की सैर करने के लिए समय निकालें, जो पुर्तगाली भारत की राजधानी के रूप में इसके दिनों की याद दिलाते हैं।
  • दक्षिण भारत के केरल राज्य में ईसाईयों की जनसंख्या 23 प्रतिशत है। सेंट जोसफ कैथेड्रल, रोमन कैथोलिक चर्च, और राज्य के लगभग सभी गिरजाघरों में मध्यरात्रि सेवाओं का आयोजन किया जाता है। कई घरों और सामुदायिक समारोहों में दावतों का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें केरल के पारंपरिक ईस्टर व्यंजनों को शामिल किया जाता है। निम्नलिखित भोजनों की तलाश करें: चिकन कबाब, स्पाइसी बेक्ड चिकन, और चिकन करी; अप्पम, एक प्रकार का नारियल-चावल का आटा “टॉर्टिला;” बेकरी में ताज़ा बनाया गया “रोटी” ब्रेड और घर की बनी वाइन; और बीफ मसाला, जो गोमांस होता है, जिसे अक्सर गाढ़ी ग्रेवी के साथ चावल के ऊपर परोसा जाता है।

भारत में कई लोग लंबे ईस्टर सप्ताहांत के लिए अवकाश पर रहते हैं और छोटे भ्रमण करते हैं, और उप-महाद्वीप को देखने के लिए आप उनके साथ शामिल हो सकते हैं। विभिन्न ईस्टर-संबंधी गतिविधियों के अलावा, भारतीय संस्कृति का पूरा आनंद उठाना ना भूलें।