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बुद्ध पूर्णिमा

बुद्ध पूर्णिमा 2017 और 2018

बुद्ध पूर्णिमा भारतवर्ष में मनाये जाने वाले बौद्ध धर्म के सबसे प्रमुख उत्सवों में से एक है।

सालतारीखदिनछुट्टियांराज्य / केन्द्र शासित प्रदेश
201710 मईबुधवारबुद्ध पूर्णिमाAS BR CG CH DL HP
HR JH JK MH MP TR
UK UP
201830 अप्रैलसोमवारबुद्ध पूर्णिमा

यह प्रमुख सार्वजनिक अवकाश भारत के मुख्य बौद्ध जनसंख्या वाले क्षेत्रों में व्यापक रूप से मनाया जाता है। हालाँकि, भारतीय जनसंख्या का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा बौद्ध धर्म से संबंधित है, लेकिन बुद्ध पूर्णिमा बेहद जीवंत उत्सव है जो दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करता है। यह उत्सव सिद्धार्थ गौतम, या भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान, और मृत्यु का स्मरण करने के लिए मनाया जाता है। भारत के अतिरिक्त, पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई क्षेत्रों में बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है। इस उत्सव की तिथि कई पश्चिमी उत्सवों की तरह ग्रेगोरियन पंचांग से निर्धारित नहीं की जाती है; इसे हिन्दू पंचांग के वैशाख महीने की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाता है। बुद्ध पूर्णिमा का उत्सव मानवता और सम्मान पर केंद्रित है।

बुद्ध का जीवन

यह सभी लोगों को ज्ञात है कि बुद्ध दुनिया भर में बौद्ध धर्म के प्रबुद्ध प्रचारक थे, लेकिन उन घटनाओं के बारे में जानना भी महत्वपूर्ण है जिनकी वजह से सिद्धार्थ गौतम ने निर्वाण प्राप्त किया। बौद्ध धर्म के विद्वानों के अनुसार, सिद्धार्थ का जन्म भारत के एक श्रेष्ठ परिवार में हुआ था। अपनी युवावस्था के दौरान सिद्धार्थ संसार के कष्टों से बिल्कुल दूर थे और बहुत वैभवशाली जीवन जीते थे। बाहरी संसार के बारे में उत्सुकता बढ़ने पर, सिद्धार्थ ने अपने एक नौकर को उन्हें पास के गरीब कस्बे में ले जाने के लिए कहा।

इस छोटी यात्रा के दौरान, सिद्धार्थ ने बीमारी, दुःख, और लालच सहित कई भयानक दृश्यों का सामना किया। इस घटना से सिद्धार्थ बहुत अधिक दुखी हुए और इसके बाद, उन्हें शराब या स्त्रियों जैसी साधारण चीजों में भी आनंद मिलना बंद हो गया। इस घटना के थोड़े समय के बाद ही सिद्धार्थ सांसारिक कष्टों का कारण खोजने के लिए यात्रा पर निकल पड़े। कई वर्षों के आत्म-चिंतन, कष्ट और ध्यान के बाद सिद्धार्थ को पता चला कि मनुष्य की इच्छा सभी सांसारिक कष्टों का कारण है। ज्ञान प्राप्त करने के बाद, सिद्धार्थ ने अपनी शिक्षाओं का भारत के लोगों में प्रचार किया। 80 वर्ष की आयु में सिद्धार्थ गौतम की मृत्यु हुई। सिद्धार्थ गौतम की शिक्षाएं आज भी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं।

बुद्ध पूर्णिमा का इतिहास

सिद्धार्थ गौतम की मृत्यु के बाद सैकड़ों वर्षों से बुद्ध पूर्णिमा का उत्सव मनाया जाता था। इसके बावजूद, इस उत्सव को 20वीं सदी के मध्य से पहले तक आधिकारिक बौद्ध अवकाश का दर्ज़ा नहीं दिया गया था। 1950 में, बौद्ध धर्म की चर्चा करने के लिए श्रीलंका में विश्व बौद्ध सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में, उन्होंने बुद्ध पूर्णिमा को आधिकारिक अवकाश बनाने का फैसला किया जो भगवान बुद्ध के जन्म, जीवन और मृत्यु के सम्मान में मनाया जायेगा।

गतिविधियां

कई भारतीय बौद्ध मानवता और मनोरंजन के विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बुद्ध पूर्णिमा का उत्सव मनाते हैं।

  • भोर से पहले समारोह
    बुद्ध पूर्णिमा मनाने के सबसे सामान्य तरीकों में से एक है सूर्योदय होने से पहले पूजास्थल पर एकत्रित होना। यह समारोह विभिन्न प्रार्थनाओं और नृत्य के साथ मनाया जाता है। कुछ क्षेत्रों में, परेड और शारीरिक व्यायाम किया जाता है। यह स्वास्थ्य और जीवन की सरल चीजों के लिए कृतज्ञता दर्शाने का एक तरीका होता है। कुछ लोग भजन में भी हिस्सा लेते हैं।
  • बौद्ध झंडा फहराना
    बुद्ध पूर्णिमा के दिन सूर्योदय होने के बाद, मंदिरों और धार्मिक महत्ता वाले अन्य स्थानों पर बौद्ध झंडा फहराया जाता है। आधुनिक बौद्ध झंडे का अविष्कार श्रीलंका में किया गया था। यह मुख्य रूप से नीले, लाल, सफ़ेद, नारंगी और पीले रंग में है। नीला रंग सभी सजीव वस्तुओं के लिए प्रेम और सम्मान दर्शाता है। लाल रंग आशीर्वाद का प्रतीक है। सफ़ेद रंग धर्म की शुद्धता दर्शाता है। नारंगी रंग बुद्धिमत्ता दर्शाता है। अंत में, पीला रंग मध्य मार्ग, और कठिन स्थितियों से बचने की प्रतिबद्धता दर्शाता है।
  • दान
    कई बौद्ध मंदिर उत्सवों का आयोजन करते हैं जो सभी उम्र के लोगों के लिए मुफ्त गतिविधियां प्रदान करते हैं। चूँकि ये कार्यक्रम निःशुल्क होते हैं, इसलिए भागीदारों के लिए भिक्षुओं को पैसे या भोजन दान करने की उम्मीद की जाती है।
  • पिंजरे में बंद जानवरों को मुक्त करना
    सहानुभूति दिखाने के लिए, कई लोग बुद्ध पूर्णिमा के दिन पिंजरे में बंद पंक्षियों और अन्य जानवरों को बाहर निकालते हैं। यह प्रथा दुनिया भर में मनुष्यों को बंदी बनाने के नैतिक मामले पर भी प्रकाश डालती है।

भारत में बुद्ध पूर्णिमा मनाने के लिए कुछ सर्वश्रेष्ठ स्थानों में से हैं:

  • बोधगया
  • गंगटोक
  • सारनाथ

बुद्ध पूर्णिमा भारतीय बौद्ध के लिए सहानुभूति दिखाने का और भगवान बुद्ध के जन्म, मृत्यु और ज्ञान का स्मरण करने का उत्सव होता है।