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गणेश चतुर्थी

गणेश चतुर्थी 2017 और 2018

हिन्दू धर्म के लोग भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन गणेश चतुर्थी का उत्सव मनाते हैं।

सालतारीखदिनछुट्टियांराज्य / केन्द्र शासित प्रदेश
201725 अगस्तशुक्रवारगणेश चतुर्थीAP GA GJ KA MH OR
PY TG TN
201813 सितंबरगुरूवारगणेश चतुर्थी

अलग-अलग लोगों और परिवारों की आस्था के आधार पर यह पर्व एक से 11 दिन तक भगवान गणेश के जन्म की खुशी में मनाया जाता है, वो हाथी के सिर और चार भुजाओं वाले देवता हैं। भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश जी अच्छे भाग्य, समृद्धि और बुद्धि के देवता है। हिन्दू धर्म की किसी भी पूजा में भगवान गणेश को किसी भी देवता से पहले स्मरण किया जाता है। गणेश जी सबके ऊपर अपनी कृपा बरसाते हैं।

गणेश चतुर्थी का इतिहास

अभिलेखों से पता चलता है कि 17वीं शताब्दी में शिवाजी के समय के दौरान गणेश चतुर्थी सार्वजनिक रूप से मनाई जाने लगी थी, जो मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे। इस समय से पहले तक, हिन्दू अपने घरों में व्यक्तिगत रूप से भगवान गणेश की पूजा करते थे। 1893 से, ब्राह्मण और गैर-ब्राह्मण जाति के लोगों को आपस में मिलाने के लिए लोकमान्य तिलक जी ने इस पर्व को बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम के रूप में आयोजित करना प्रारम्भ किया।

समारोहों और कार्यक्रमों का स्थान

सामान्य तौर पर, आंध्र प्रदेश, गोवा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु राज्य के निवासी गणेश चतुर्थी के उत्सवों में हिस्सा लेते हैं। इस समय के दौरान, आस्थावान लोग मुम्बई जैसे बड़े शहरों में आकर सिद्धिविनायक मंदिर में पूजा और दान करते हैं। यह मंदिर भगवान गणेश के लिए निर्मित और समर्पित है।

गतिविधियां और त्योहार

त्योहार के पहले दिन, विभिन्न लोग और परिवार गणेश जी की प्रतिमा अपने घर लाते हैं या उन्हें समुदायों में टेंट के अंदर मंचों पर स्थापित किया जाता हैं। हालाँकि ज्यादातर लोग भगवान की पारंपरिक प्रतिमा लेते हैं, लेकिन कुछ कलाकार विभिन्न डिज़ाइन और स्मार्टफोन या लैपटॉप जैसे टेक उपकरणों के साथ भगवान गणेश को ज्यादा आधुनिक रूप में प्रस्तुत करने का प्रयत्न करते हैं। भगवान गणेश की प्रतिमाएं प्लास्टर ऑफ पेरिस सहित कई अन्य सामग्रियों से निर्मित की जाती हैं। कुछ मूर्तियां मिट्टी, चॉकलेट, लड्डू या धान से भी बनाई जाती हैं। मूर्तियों का आकार और मूल्य एक-दूसरे से काफी अलग होता है।

मनचाहे स्थान पर स्थापित करने के बाद, प्राण प्रतिष्ठा पूजा की रस्म शुरू होती है। पुजारी मंत्रोच्चारण और पूजा के माध्यम से मूर्ति में भगवान की उपस्थिति को जाग्रत करते हैं। आमतौर पर, मूर्ति का चंदन से अभिषेक किया जाता है। सार्वजनिक स्थानों के अतिरिक्त, पुजारी अलग-अलग लोगों के लिए भी यह सेवा प्रदान करते हैं।

सम्पूर्ण पर्व के दौरान, भक्तगण नारियल, फूल, गुड़, पारंपरिक मिठाइयां और सिक्के भगवान को अर्पित करते हैं। पुजारियों और नागरिकों के द्वारा प्रतिदिन पूजा की जाती है। जब लोग अपने घरों में भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित करते हैं तो गणेश जी को सम्मानित मेहमान के रूप में माना जाता है। रिवाजों का पालन करना भगवान का आशीर्वाद पाने का एक साधन भी है। तकनीक के विकास के साथ, वर्तमान में हिन्दू लोग गणेश चतुर्थी की प्रार्थनाएं और आशीर्वाद अपने दोस्तों और परिजनों को ऑनलाइन भेज सकते हैं। इस कार्यक्रम के दौरान उपहारों का आदान-प्रदान भी सामान्य बात है।

गणेश चतुर्थी का अंतिम दिन

11 दिन के उत्सव के दौरान, विभिन्न शहर और समुदाय लाइव संगीत या कला प्रदर्शनियां आयोजित करके मेले जैसा परिवेश तैयार करते हैं। विशेष रूप से, अक्सर बड़े शहरों में निःशुल्क चिकित्सा जांच प्रदान किये जाते हैं, रक्त दान की व्यवस्था की जाती है और अन्य धर्मार्थ कार्य किये जाते हैं जिससे गरीबों का भला होता है।

इस पर्व के अंतिम दिन, जिसे अनंत चतुर्दशी के रूप में जाना जाता है, भगवान गणेश की मूर्तियों को विसर्जित करने के लिए नाचते-गाते हुए शोभायात्रा निकाली जाती है। समुद्र के पास आकर, एक विशेष निर्मित पानी की टंकी या पानी के अन्य पात्र में प्रतिभागी प्रतिमाओं को विसर्जित करते हैं, जिससे सामग्रियां वापस धरती में मिल जाती हैं। घरों में मूर्ति स्थापित करने वाले लोग अपनी मूर्तियों को पानी की बाल्टी में डूबा सकते हैं या ऐसे ही अन्य विकल्पों का प्रयोग कर सकते हैं।

नष्ट होने वाली सामग्रियों से बनाई गयी मूर्तियों को जल में प्रवाहित करने की वजह से होने वाले जल प्रदूषण के बढ़ते हुए खतरे को देखते हुए, सरकारी अधिकारी समारोह के लिए लोगों को सार्वजनिक जलमार्गों का प्रयोग ना करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। कलाकारों को भी नष्ट ना होने वाली सामग्रियों से गणेश जी की प्रतिमाएं बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस प्रकार, मूर्ति को हर साल प्रयोग किया जा सकता है।