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रमज़ान / ईद उल फितर

रमज़ान / ईद उल फितर 2017 और 2018

ईद उल फितर एक महत्वपूर्ण इस्लामी उत्सव है जिसे भारत के सभी हिस्सों में, सभी मुस्लिमों के द्वारा मनाया जाता है।

सालतारीखदिनछुट्टियांराज्य / केन्द्र शासित प्रदेश
201726 जून *सोमवारईद-उल-फितरसभी राज्य
(सिवाय AN AR DD DN
LD ML MN MZ NL SK)
27 जून *मंगलवारईद-उल-फितरTG
201815 जून *शुक्रवारईद-उल-फितरसभी राज्य
(सिवाय AN AR DD DN
LD ML MN MZ NL SK)

* परिवर्तन के अधीन 

कई राज्यों में इसे सार्वजनिक अवकाश के रूप में भी मनाया जाता है। ईद उल फितर रमज़ान के उपवास की अवधि की समाप्ति दर्शाता है और इसे दावतों, उपहारों, नृत्य, उत्सवों, और धार्मिक रस्मों के साथ मनाया जाता है।

रमज़ान (सामान्यतः रमदान के रूप में जाना जाता है), उपवास का समय होता है, जिसे इस्लामी पंचांग के नौवें महीने के दौरान मुस्लिमों द्वारा मनाया जाता है। इस उपवास का समय बढ़ते हुए चंद्रमा के चक्र के आधार पर 29 या 30 दिनों तक चल सकता है। उपवास भोर में शुरू होता है और सूर्यास्त के समय समाप्त होता है, और कई शिक्षाएं देता है जिनमें आत्म-संयम, बलिदान, गरीबों के लिए दान और सहानुभूति, सांसारिक चीजों और इच्छाओं से अलगाव, अल्लाह से निकटता शामिल है।

रमज़ान के उपवास के दिनों के बाद, इसे ईद उल फितर के दो या तीन दिन के समारोह से समाप्त किया जाता है। यह इस्लामी पंचांग के अगले महीने, शव्वाल का पहला दिन होता है। इस दिन किसी भी मुस्लिम को उपवास रखने की अनुमति नहीं होती है, क्योंकि यह “उपवास तोड़ने का समय” होता और जश्न का दिन होता है।

इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद ने मक्का से अपने प्रवास के बाद मदीना में ईद उल फितर स्थापित किया था। ऐसा कहा जाता है कि वो उन लोगों से मिले जो खेल, मनोरंजन और आनंद के रूप में दो विशेष दिन मना रहे थे। उन्होंने इस अनुभव को अपना लिया, और कहा कि अल्लाह ने ईद उल फितर का दिन लोगों को जश्न मनाने के लिए दिया है।

ईद उल फितर से एक दिन पहले की रात को चाँद की रात कहते हैं। कई लोग इस दिन का प्रयोग तोहफे खरीदने के लिए और अगले दिन की तैयारी के लिए करते है। इस दिन एक खुले सामूहिक परिवेश में विशेष नमाज़ पढ़ी जाती है जो अतिरिक्त छह अज़ान के साथ दो हिस्सों में की जाती है। उपदेश और नमाज़ के बाद, भारतीय मुस्लिम उपहारों के आदान-प्रदान, दावतों, बाज़ारों, मेंहदी, परिजनों से मुलाकातों, और चैरिटी में दान देने जैसे कार्यक्रमों में लग जाते हैं। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य होता है खुशियां मनाना, कृतज्ञता, क्षमा दिखाना, अल्लाह का धन्यवाद करना और उन्हें याद करना।