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होली

होली 2017 और 2018

होली भारतवर्ष में धूमधाम से मनाया जाने वाला हिंदुओं का एक रंगीन और खुशियों भरा त्योहार है जो सर्दी के मौसम के अंत में फाल्गुन के चंद्र मास की अंतिम पूर्णिमा के दिन पड़ता है।

सालतारीखदिनछुट्टियांराज्य / केन्द्र शासित प्रदेश
201713 मार्च सोमवारहोलीBR CG CH DL GA GJ
HP HR JH MH OR PB
RJ TR UK UP
20183 मार्चशनिवारहोलीBR CG CH DL GA GJ
HP HR JH MH OR PB
RJ TR UK UP

यह फरवरी के अंत में या मार्च की शुरुआत में मनाया जाता है। इसे रंगों के त्योहार के रूप में भी जाना जाता है।

होली भारत के सबसे बड़े और सबसे लोकप्रिय उत्सवों में से एक है। यह त्योहार पूरे भारतवर्ष के कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में मनाया जाता है, इसलिए इसमें आनंद और रोमांच का बहुत ज्यादा अवसर होता है। पारंपरिक रूप से, होली बुराई पर अच्छाई की जीत दर्शाने के लिए मनाई जाती है। इसे होलिका की कथा सहित, कई कथाओं से जोड़ा जाता है। भारत में कई लोग मानते हैं कि इस उत्सव में हिन्दू लोगों की आस्था भगवान विष्णु की शक्ति में वृद्धि कर सकती है। यह त्योहार भगवान विष्णु के अवतार, भगवान कृष्ण के लिए भी मनाया जाता है। इसके धार्मिक पहलु के अतिरिक्त, होली सर्दी के समापन और वसंत ऋतु के आगमन को भी दर्शाता करता है। होली को रंगों का त्योहार कहते हैं। यह उत्सव आधिकारिक रूप से फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, लेकिन इसे भारत के कुछ क्षेत्रों में अलग-अलग तिथियों पर मनाया जाता है।

होली से संबंधित कथाएं

  • होलिका और प्रह्लाद

होलिका और प्रह्लाद की कथा होली की सबसे महत्वपूर्ण कथाओं में से एक है। हिन्दू ग्रंथ नारद पुराण के अनुसार, एक बार संपूर्ण संसार पर हिरण्यकश्यप नामक राक्षस का शासन था। हिरण्यकश्यप बेहद क्रूर राजा था और सभी लोगों से अपनी पूजा करवाना चाहता था। लेकिन हिरण्यकश्यप के बेटे प्रह्लाद ने उसकी पूजा करने से मना कर दिया। इसके बजाय, प्रह्लाद भगवान नारायण का भक्त था। यह हिरण्यकश्यप के लिए एक बड़ी समस्या थी क्योंकि प्रह्लाद उसका पुत्र था। हिरण्यकश्यप ने कई बार प्रह्लाद को मरवाने की कोशिश की, लेकिन भगवान विष्णु की वजह से प्रह्लाद हमेशा बच जाता था।

जब उसे यह आभास हो गया कि वो प्रह्लाद को नहीं मार पायेगा तो हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की सहायता मांगी। होलिका एक राक्षसिनी थी और उसे यह वरदान था कि अग्नि उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकती है। होलिका ने प्रह्लाद को अपनी गोद में बैठने के लिए मनाया। जब प्रह्लाद उसके साथ बैठने के लिए तैयार हो गया तो होलिका ने उसे पकड़ लिया और आग की लपटों में बैठ गयी। होलिका को जल्दी ही पता चल गया कि अग्नि तब तक ही उसे नुकसान नहीं पहुंचा सकती है जब तक कि वह आग में अकेले जाती है। चूँकि, होलिका के साथ प्रह्लाद भी था, इसलिए होलिका जल गयी। प्रह्लाद आग से सकुशल निकल आया। बाद में, प्रह्लाद को ज्ञात हुआ कि उसकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान नारायण ने उसे अग्नि से सुरक्षा प्रदान की थी। कई हिंदू इस कथा को भगवान विष्णु और अन्य महत्वपूर्ण देवी-देवताओं के लिए आस्थावान बने रहने के कारण के रूप में देखते हैं।

  • राधा और कृष्ण

जब भगवान कृष्ण छोटे थे तो उन्हें राधा के गोरे रंग से ईर्ष्या होती थी। अपनी ईर्ष्या को प्रकट करने के लिए, कृष्ण ने राधा के मुंह पर गुलाल मल दिया। वर्तमान में, दूसरे व्यक्ति पर रंग डालने की इस गतिविधि को दोस्ती और प्रेम दर्शाने के प्रतीक के रूप में माना जाता है। यह कथा होली के त्योहार के दौरान दूसरे लोगों पर रंग डालने की सुप्रसिद्ध परंपरा को दर्शाती है।

उत्सव की गतिविधियां

आनंद लेने के लिए और भगवान विष्णु के प्रति अपनी आस्था प्रदर्शित करने के लिए भारतीय लोग उत्सव की कई गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।

  • रंग डालना

होली की सबसे प्रसिद्ध गतिविधियों में से एक है एक-दूसरे पर रंगीन पानी और गुलाल फेंकना। यह एक रोमांचक गतिविधि है जो देवी-देवताओं, दोस्तों, और परिवार के सदस्यों के लिए आस्था और सम्मान दर्शाने के लिए प्रयोग की जाती है।

  • राधा माँ की पूजा

माँ राधा हिन्दू देवी और श्रीकृष्ण भगवान की प्रेयसी हैं। पारंपरिक कथाओं के अनुसार, राधा जी पहली स्त्री थीं जिनके ऊपर प्रेम प्रदर्शित करने के लिए रंग डाला गया था। माँ राधा की पूजा के दौरान, कई लोग माता की प्रतिमा के सामने होली के गीत गाते हैं और नाटक का प्रदर्शन करते हैं।

  • होलिका दहन

होलिका और प्रह्लाद की कथा के दौरान बुराई पर अच्छाई की विजय का जश्न मनाने के लिए, कई लोग होली की शाम को बड़ा अलाव जलाते हैं। ऐसी मान्यता है कि यह अग्नि बुरी शक्तियों को होलिका के विनाश की याद दिलाकर उन्हें दूर करती है। अलाव जलाना एक आनंददायक गतिविधि है। कई लोग इस अवसर पर नाच, गाना करते हैं और अपने दोस्तों और परिवारजनों से मिलते हैं। इस गतिविधि को होलिका दहन के रूप में जाना जाता है।

  • भांग का सेवन

कई लोग ठंडाई पीकर होली के त्योहार का आनंद लेते हैं, यह एक पेय पदार्थ है जिसे भांग का मिश्रण मिलाकर तैयार किया जाता है। यह एक पारंपरिक चीज है जो लोगों को त्योहार के दौरान राहत देने में सहायता करती है।

भारत में कई स्थानों पर होली का त्योहार मनाया जाता है। चूँकि, भारत एक बड़ा देश है, इसलिए प्रत्येक शहर का रंगों का उत्सव मनाने का एक अलग अंदाज़ और तरीका है।

  • मथुरा की होली भारत के अन्य क्षेत्रों में मनाई जाने वाली होली से काफी अलग है। इस क्षेत्र में यह त्योहार होली की औपचारिक शुरुआत से 40 दिन पहले शुरू हो जाता है। वे पर्यटक जो पारंपरिक होली के जश्न का आनंद उठाना चाहते हैं उनके लिए यह स्थान सबसे आदर्श है। ऐसी मान्यता है कि भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था, इसलिए यह शहर भारतीय भक्तगणों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
  • शांति निकेतन उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो स्थानीय नृत्य कलाएं सीखना चाहते हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेना चाहते हैं। चूँकि, इस क्षेत्र में बहुत सक्रिय पर्यटन विभाग है, इसलिए यह कई विदेशियों को आकर्षित करता है।
  • पेरुली में होली का जश्न लोक उत्सव पर आधारित होता है जो उस क्षेत्र की पारंपरिक कला और संगीत को प्रदर्शित करता है। चूँकि, पेरुली एक ग्रामीण इलाका है, इसलिए यहाँ मनाया जाने वाला जश्न बड़े भारतीय शहरों में मनाए जाने वाले होली के जश्न से पूरी तरह अलग होता है।
  • आनंदपुर साहिब में सिख जनसंख्या अपने अंदाज़ में होली का त्योहार मनाती है। रंग फेंकने के बजाय, इस क्षेत्र के लोग असाधारण मार्शल आर्ट्स प्रदर्शन और प्रतियोगिता आयोजित करते हैं। भारत के इस क्षेत्र में कुश्ती प्रतियोगिताएं और कलाबाजी के प्रदर्शन सामान्य हैं।
  • अद्भुत होली के जश्न की तलाश में आने वाले पर्यटकों के लिए जयपुर सबसे अच्छी जगह है। इस शहर में रंगों का उत्सव हाथियों और सुंदर संगीत पर केंद्रित होता है।
  • आधुनिक होली के जश्न के लिए दिल्ली सबसे अच्छे स्थानों में से एक है। दिल्ली में उत्सव का आनंद लेने के लिए आने वाले लोग सबसे लोकप्रिय गतिविधियों, संगीत और भोजन का आनंद उठा सकते हैं।

होली एक जीवंत त्योहार है जो भारतीय लोगों को अपने दोस्तों और परिजनों के साथ मज़ेदार गतिविधियों में हिस्सा लेने का अवसर देता है।

होली का जश्न होली से एक दिन पहले होलिका दहन के साथ ही शुरू हो जाता है। पारंपरिक रूप से, सर्दी के समापन के प्रतीक के रूप में लकड़ियाँ और सूखे पत्ते एकत्रित करके अलाव में आग जलाना पुरुषों और लड़कों का कार्य होता है। दुर्भाग्य से, होलिका जलाने के लिए हरे-भरे पेड़ों को काटने के साथ वर्तमान में इस परंपरा में परिवर्तन हो रहा है।

होली के रंग बहुत विशेष होते हैं और इस दिन का उत्साह बढ़ा देते हैं। पुराने ज़माने में, लोगों को लगाने के लिए प्रयोग किये जाने वाले रंग प्राकृतिक होते थे लेकिन अब उनमें से कई रंग कृत्रिम होते हैं और कुछ रंगों में घातक रसायन भी होते हैं जिसकी वजह से कुछ लोगों की त्वचा पर जलन होने लगती है। होली के जश्न के दौरान, लोग एक-दूसरे पर सुगंधित, रंगीन गुलाल डालते हैं।